ओवरसीज़ से 40 करोड़, बजट 15 करोड़ — फिर घाटा कहां से?
अमित जानी ने अपने एक वायरल वीडियो में कहा था कि –
> “हमने ये फिल्म 15 करोड़ में बनाई है। इसके ओवरसीज़ राइट्स पहले ही 40 करोड़ में बिक चुके हैं। थिएटर से 400 से 500 करोड़ की कमाई होगी। हजारों स्क्रीन पर इसे बाँटा गया है। यह दुनिया का पहला PPT मॉडल है, जहां जनता खुद स्क्रीन बाँटकर फिल्म तक पहुँचेगी।”
वीडियो का लिंक – https://www.facebook.com/share/r/14JVHY5h4NY/
अगर ओवरसीज़ में 40 करोड़ मिल गए, और बजट केवल 15 करोड़ था, तो फिल्म घाटे में कैसे? ऊपर से दावा कि पंजाब, दिल्ली, लखनऊ जैसी जगहों में स्क्रीन बाँटी गईं—पर वास्तविक बॉक्स ऑफिस कलेक्शन मात्र 1.5 करोड़ ही रहा। इन आंकड़ों में गहरा विरोधाभास है।

पूर्व विवादों का लंबा इतिहास
अमित जानी किसी न किसी विवाद में बने रहे हैं:
2012: अम्बेडकर पार्क, लखनऊ में मायावती की मूर्ति को तोड़ने के आरोप। इसके बाद उन्होंने “उत्तर प्रदेश नव निर्माण सेना” नामक संगठन बनाया।
2017–2019 तक कई विवाद—जैसे “कश्मीरियों को अनुमति नहीं” वाला होर्डिंग, राजनीतिक हिंसा से जुड़ी टिप्पणियाँ, शंभूलाल रेगर को लोकसभा टिकट देने की घोषणा आदि।
2022 तक दर्ज मुकदमें—शिवसेना कार्यालय की तोड़फोड़, धमकियाँ, धोखाधड़ी, दहेज उत्पीड़न, शारीरिक स्थिति से जुड़ी आपराधिक घटनाएँ।
कंबल बांटने का विवाद: हरियाणा के एक व्यापारी ने आरोप लगाया कि जानी ने गरीबों में वितरित किए गए कंबलों के पैसे नहीं चुकाए — लगभग ₹51 लाख का मामला।
ये सब दिखाता है कि अमित जानी विवादों से अक्सर घिरे रहे हैं—जिससे अब PPT मॉडल और ट्रांसपेरेंसी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
फिल्म पर विवाद, सुरक्षा, और संवेदनशीलता
विवादास्पद विषय: उदयपुर फाइल्स में नूपुर शर्मा, दारुल उलूम देवबंद, ज्ञानवापी मस्जिद जैसे संवेदनशील विषयों का चित्रण होने के कारण अनेक फैटवा और याचिकाएं बढ़ गईं। कोर्ट-कचहरी में उलझकर रिलीज़ रोकी गई।
सेंसर बोर्ड ने 55 कट्स लगाकर ही सर्टिफिकेट दिया, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी जुड़े।
Y-कैटेगरी सुरक्षा: क्रिप्टिक धमकियों और संवेदनशीलता के चलते अमित जानी को केंद्र सरकार से Y श्रेणी सुरक्षा दी गई, जो 8–11 सैनिकों द्वारा प्रदान की जाती है।
धमकियाँ प्राप्त होना: फिल्म रिलीज के बाद अमित जानी ने खुद बताया कि उन्हें फोन से बम धमकी और हत्या की धमकी मिली।
ये सब उनकी सुरक्षा और विवादग्रस्तता की भयावह राजनीति को उजागर करते हैं।
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संक्षेप में: सवाल उठते ही जाते हैं…
1. वित्तीय विरोधाभास
ओवरसीज़ राइट्स = ₹40 करोड़
बजट = ₹15–20 करोड़
बॉक्स ऑफिस कलेक्शन = केवल ₹1.5 करोड़
बढ़ा-चढ़ाकर खर्च या आय दिखाने का प्रयास?
2. निवेशकों और जनता के लिए पारदर्शिता का अभाव
PPT मॉडल का दावा — थिएटर को फायदा, जनता को स्क्रीन।
असल में लोग निवेशक बने, लेकिन रिटर्न और वितरण स्पष्ट नहीं।
“स्क्रीन बाँटने” के नाम पर क्या पैसे लिए गए, कोई लेखा-जोखा नहीं।
3. विवादों का भारी इतिहास
राजनीतिक हिंसा, धार्मिक उन्माद, हिंसात्मक टिप्पणियाँ, और आपराधिक मामले।
क्या ऐसे व्यक्ति के नेतृत्व में फिल्म मॉडल पारदर्शी या नैतिक हो सकता है?
4. सुरक्षा और कानूनी संकट
Y-Category सुरक्षा, धमकियाँ, सेंसर बोर्ड और न्यायालय की रोक — ये सब दिखाते हैं कि फिल्म न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक और कानूनी संघर्ष के केंद्र में रही।
अमित जानी की कहानी—एक ओर ओवरसीज़ आय का दावा; दूसरी ओर बॉक्स ऑफिस पर पूरे मॉडल का ध्रुवीकरण; करोड़ों का खर्च लेकिन लाखों की कमाई; साथ ही लगातार विवादों का साया—यह सब मिलकर PPT मॉडल को एक “संभावित स्कैम” की शक्ल दे रहे हैं, बनाम “नया वितरण प्रयोग” की।
अब सवाल यह है:
क्या यह भारतीय सिनेमा में नया एडवेंचर था, या जनता की भावनाओं और पैसों से खेलकर बड़ा गेम?
और क्या सरकार, फ़िल्म संस्थाएँ या मीडिया इस पर गहराई से जाँच करें?
