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ट्रंप टैरिफ की चुनौती और भारत की स्वदेशी क्रांति: मेक इन इंडिया से वैश्विक नेतृत्व तक का सफर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लागू किया गया टैरिफ केवल एक आर्थिक नीति नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था के बदलते समीकरण का संकेत है। यह कदम उन देशों के लिए चेतावनी है जो अमेरिकी बाज़ार पर अत्यधिक निर्भर हैं। भारत, जो विश्व की पाँचवीं सबसे बड़ी और सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, इस चुनौती का सामना कर रहा है।

वित्त वर्ष 2023-24 में भारत-अमेरिका का द्विपक्षीय व्यापार 200 अरब डॉलर के पार पहुंच गया। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार है, जिसमें आईटी सेवाएं, फार्मास्यूटिकल्स, रत्न-आभूषण और वस्त्र शामिल हैं। टैरिफ बढ़ने से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाज़ार में महंगे हो सकते हैं, जिससे निर्यात, रोज़गार और विदेशी मुद्रा आय पर असर पड़ सकता है।



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “मेक इन इंडिया” अभियान इस परिस्थिति में और प्रासंगिक हो गया है। इसका लक्ष्य भारत में उत्पादन बढ़ाना, आयात पर निर्भरता घटाना, और “मेड इन इंडिया” को वैश्विक ब्रांड बनाना है। वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत मिशन भी इसी दिशा में कार्यरत हैं।

सरकार की प्रमुख योजनाएं जैसे पीएलआई योजना, स्टार्टअप इंडिया, भारतमाला और सागरमाला परियोजनाएं, डिजिटल इंडिया और कृषि निर्यात नीति इस चुनौती से निपटने में मददगार साबित हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नए अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों की खोज, वैश्विक सप्लाई चेन में भागीदारी, और ब्रांड इंडिया को मजबूत कर भारत इस टैरिफ दबाव को अवसर में बदल सकता है।

आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि भारत घरेलू उत्पादन, नवाचार और स्वदेशी ब्रांडिंग पर जोर दे, तो वह न केवल अमेरिका के टैरिफ दबाव से मुक्त हो सकता है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक निर्णायक शक्ति के रूप में उभर सकता है।

Abhi Varta
Author: Abhi Varta

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