भगवान बिरसा जैविक उद्यान, रांची और प्राणी उद्यान, अलीपुर (कोलकाता) के बीच जीव आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत 6 वर्षीय मादा उत्तरी जिराफ़ ‘मिस्टी’ और सिल्वर फीजेंट का एक जोड़ा रांची लाया गया है। उद्यान निदेशक जब्बर सिंह ने बताया कि यह कार्यक्रम लंबे समय से लंबित था, जिसे अब सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। जल्द ही नर जिराफ़ को भी रांची लाया जाएगा।

मिस्टी की ऊँचाई 12 फीट से अधिक है, जिसके लिए 14 फीट ऊँचा विशेष बाड़ा तैयार किया गया। कोलकाता से रांची तक इसे लाने में लगभग 24 घंटे लगे, क्योंकि ट्रेलर में लादने के बाद इसकी कुल ऊँचाई 16-17 फीट रही। जिराफ़ के आगमन पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक परितोष उपाध्याय भी मौजूद रहे।
उत्तरी जिराफ़ अफ्रीका के पूर्वी और मध्य भागों में पाए जाते हैं और इनका औसत जीवनकाल चिड़ियाघरों में 19-20 वर्ष होता है। यह शाकाहारी प्राणी है जिसे विभिन्न वृक्षों की पत्तियां और घास खिलाई जाती हैं।
इस आदान-प्रदान में रांची की ओर से फिलहाल शुतुरमुर्ग भेजा गया है, जबकि अगले चरण में दरियाई घोड़ा, हिमालयन काला भालू और घड़ियाल का भी आदान-प्रदान किया जाएगा। यह पहल वन्यजीव संरक्षण और आगंतुकों के लिए जीवों की विविधता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है।
