अभी वार्ता/मोतिहारी/संग्रामपुर/संतोष पाण्डेय
बिहार सरकार की बहुप्रचारित ‘हर घर नल का जल’ योजना की जमीनी हकीकत संग्रामपुर प्रखंड में पूरी तरह उजागर हो चुकी है। प्रखंड के उत्तरी बरियारिया पंचायत के कई वार्डों में यह योजना कागजों में तो सफल दिखती है, लेकिन वास्तव में पूरी तरह फेल हो चुकी है। वार्ड संख्या 11 के लगभग 100 घरों में नल का कनेक्शन होने के बावजूद आज तक एक बूंद भी स्वच्छ जल नहीं पहुंच पाया।

वार्ड सदस्य श्यामसुदीन देवान व स्थानीय ग्रामीण फिरोज आलम, अफरोज आलम, मेराज देवान और राजू मिया ने बताया कि यह योजना सिर्फ दिखावे की बनकर रह गई है। सरकारी रिकॉर्ड में योजना को पूर्ण और सफल बताया जा रहा है जबकि लोग गंदा, बदबूदार और कभी-कभी बिल्कुल भी पानी न मिलने की समस्या से जूझ रहे हैं।
वार्ड संख्या 4 और 12 में टंकियों की वर्षों से सफाई नहीं हुई है, मोटर जल गई हैं और पाइप लीकेज से सड़क पर पानी बह रहा है। वहीं, कुछ स्थानों पर टंकी फटने से पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप है। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित विभागों – प्रखंड पंचायती राज कार्यालय और पीएचडी – को कई बार शिकायत देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जब पीएचडी के जूनियर इंजीनियर सचिन से पूछा गया तो उन्होंने जिम्मेदारी पंचायत के मुखिया पर डाल दी, जिससे यह साफ होता है कि विभागीय अधिकारी जिम्मेदारी से बच रहे हैं।
वार्ड सदस्य कृष्णा महतो, श्वेता पांडेय, कन्हैया पासवान और धीरज पंडित ने गहरी नाराजगी जाहिर की और कहा कि यह योजना भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ चुकी है। ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि इस महत्वाकांक्षी योजना की साख को बचाया जा सके।
